Marqaz

तुम साथ तो नहीं हो मेरे

मगर ज़िन्दगी का मरकज़ बन चुकी हो

छूटता नहीं है रोज़ तुझे यूं लिखना

तुम मेरी ग़ज़लों की इबादत बन चुकी हो

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Bahut khoob dost

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Sundar…

:heart::heart: