Manzil

one-liner
serious
shayari

#1

माना मेरे हाथों की लकीरे सीधी नहीं
पर अपनी मंजिल के रास्ते भी टेढ़े चुनू
ये मेरी फितरत नहीं…


#2

are wah… kya baat hai…


#3

bahut khoob, bahut khoob