Love (Valentine's special)

एहसास :heart:

मैं कविता नहीं , एहसास लिख रही हूं
आज तुम्हारे लिए कुछ खास लिख रही हूं…

यूं तो ,
तुमसे मिलना मुकद्दर में नहीं है
फिर भी ,
तुमसे मिलने की आस लिख रहीं हूं
आज तुम्हारे लिए कुछ खास लिख रही हूं…

अजनबी थे तुम , अब पहचान बन गए
पहचान बढ़ाते बढ़ाते , तुम मेरी जान बन गए …
कि जान मेरी , मैं
तेरे - मेरे मसाफ़त की दास्तां लिख रहीं हूं
तुम्हारे लिए कुछ खास लिख रही हूं…

तेरे जाने के गिर्दाब से ,मैं यूं शायर बन गई हूं
कि शब्द टिकें कैसे पन्ने पर , अब ये मैं जान गई हूं
आज तुम्हारे लिए कुछ खास लिख रही हूं…

कि अपने दर्द का सफ़ीना , कोरे कागज पर उतार रही हूं
सीने में दबीं इक सांस को अब बाहर मैं निकाल रही हूं
आज तुम्हारे लिए कुछ खास लिख रही हूं …

जो तोहमत लगा मुझपर तेरे प्यार का
उस दर्द_ए_दिल को बयां कर रही हूं
आज तुम्हारे लिए कुछ खास लिख रहीं हूं…!

[{मसाफ़त - दूरी (distance ) ; गिर्दाब - भंवर ( vortex ) ;
सफ़ीना - नांव ( boat )]

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very well written and welcome to YoAlfaaz :slight_smile:

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Great start. :heart:
Welcome to YoAlfaaz dear. :heart:

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Thank you ma’am

Thanks sir

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I Love It! @Manu_Jain
and
Welcome to YoAlfaaz family
keep writing and sharing :slightly_smiling_face:

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:pray::blush:

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Thank you :blush:

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Behtareen .Good …
jupiter aur yoalfaaz media partner …
Yoalfaaz family mein apkaa swaagat karta hai …:bouquet::bouquet::bouquet:

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That’s fabulously written :ok_hand::ok_hand::ok_hand::orange_heart:

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Bada sahi likha hai…!!:+1:
Welcome to YoAlfaaz family :blush:
Keep inking keep expressing

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Thanks

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:blush::blush:

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Thank you :blush:

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