Leeza (ek ajanabi )

अपनी आज़ादी से ज़िन्दा हैं।
वो एक अंजान परिंदा हैं।

बेहद उसकी ख़ुराक़ हैं।
उसे मुख़्तलिफ़ मुक़ाम की तलाश हैं।

रहती हैं ज़मी पर।
निगाहों में आकाश हैं।

बेइंतहा खुशमिज़ाज हैं।
अलाहिदा उसका अंदाज़ हैं।

माना गुफ़्तुगू नहीं हमारे दरमियां।
दुआ का तालिब हूँ* कि मिल जाये तुझे मुक्कमल जहाँ।
क़ामयाबी क़दम चूमे, ना हो ज़्यादा इम्तेहां।

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