Khyal

फ़ासला ना हो जाए
हम-हम कहीं तुम और मैं ना हो जाए
हर पल तेरी याद तड़पाती है
बीते दिन और प्यार जगा जाती हैं
दूर हो जाऊँ तुझसे आख़िर कैसे मैं
ये सोच भी आँखो में आँसु ले आती है
सोचती हु छोड़ दूँ होगा जो देख लेगे
लेकिन तुझसे दूरी कैसे सहन करूँगी
जो मेरी बातें ना हुई तुझसे तो मै अपनी नींद पूरी कैसे करूँगी
किसी हुस्न को तेरी बाँहों में ना देख पाऊँगी
जो सांसें मेरी है वो मैं किसी और को केसे दान दे आऊँगी
हक़ है तेरे रूह को सुकून बस मेरी रूह ही देगी
आख़िर तेरी आँखों में किसी और की तस्वीर मैं कैसे देख पाऊँगी
हाँ!!आ जाती आँसु मेरी मुरझाए आँखो में
जब सोचतीं दूर ना हो जाऊँ मैं तुझसे
फिर में ये आँसु किसके नाम करूँगी??
मुस्कुरा जो लेती हु आँखे झुका के मैं
ये शर्म और लिहाज़ का मै क्या करूँगी??
दिल जो पत्थर-सा पिघला दिया तेरी बातों ने
ग़र टूट गया तो लोग नीलाम करेंगे सरे-आम
तेरे होने बाद भी किसी गेर के नाम करेंगे
वो बस लूटेंगे इज़्ज़त मेरी आख़िर
मेरे रूह के नाम सुकून कौन करेगा
रहती हु महफ़ूज़ साथ मैं तेरे
तेरे बाद मुझे महफ़ूज़ कौन रखेगा
करती बातें मैं तुझसे हु
आख़िर जाने बाद तेरे मेरी बातें मेरे अलावा कौन सुनेगा
मैं नाज़ुक-सी कली हु
आख़िर मेरी हिफ़ाज़त कौन मालिक करेगा …।।।।

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Nicely written @penoholicphilosopher
:sweat_smile::heart::orange_heart: