Khwahiye

ख्वाबों में तेरा आनाजाना अकसर हुआ है,
पर वो ख़्वाब नई एक भ्रम हुआ है,
जो तू ख़्वाब होता तो साथ होते हम और तुम,
तू भ्रम है इसलिए जुदा है आज हम और तुम,
आज रातों में जग कर कोई ख़्वाब नहीं पनप रहा है,
कशमकश का सेहलाब सा है जो उठ रहा है,
वो पन्ने जो सिलवटें ले रहे थे अधूरे लिखे हुए,
क्या खूब केह रहे है वो तेरे राज़ छुपे हुए।
~jani @Nagma_lafzo_ka

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kamal​:clap::clap: bahut kamal ka lekha hai aapne @Nagma_lafzo_ka

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well penned :heart_eyes: :cherry_blossom:

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Thnku so much mam it means alot for me and bus hum to likh lete hai thoda bhot bus aapke jitna acha bhi nahi

Thnku buddy

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