Khwahishein

सुबह सुबह चाय का प्याला लेकर, बाहर अपने घर के उस छोटे से बगीचे में आकर जो बैठी मैं, अचानक नज़र दो पंछियो पर गयी । उलझे हुए से थे वो अपनी ही नोंक झोंक में, कभी इधर कभी उधर, उछलते फुदकते और अचानक उड़ गए खुले आसमां में अपने परो की ताकत को आज़माने।
और मैं बैठी रही अपने उस चाय के प्याले के साथ और मानो हर एक घूंट के साथ अतीत के पन्ने पलटते जा रहे थे,
और यकीन ही नही हुआ कि कितना वक्त गुज़ार दिया। बेटी से माँ तक का ये सफर कितना लंबा था, कितने साल गुजर गए इस सफर में ज़िम्मेदारिया निभाते निभाते,
तो फिर आज अचानक क्यू इन पंछियो को उड़ता देख कर मन बैचैन हो गया । जैसे अचानक दिल से आवाज़ आयी हो कि अब उड़ जाऊं, मैं भी यूं ही किसी खुले आसमां में… पंख पसार कर आसमां की ऊंचाइयों में खो जाउ कही… जहां किसी को मुझसे काम ना हो, किसी की आवाज़ें ना हो मेरे कानों में, बस मैं हुं, खुला आसमां और मेरी ख्वाइशें…
कितना कुछ सोच लिया था इतने से पलो में, कल्पनाओ के पंख इतने बड़े होते है कि आपको आपके यथार्थ से दूर कर देते है कुछ ऐसा ही महसूस कर रही थी ‘मैं’ यथार्थ से दूर, बस अपनी कल्पनाओं में कही खोई हुई …
और अचानक मेरे कंधे पर दस्तक महसूस हुई और एक पल में सारी कल्पना सारी ख्वाहिशे सारे सपने जैसे वापिस ज़मीन पर आ गए ।
और मैं देख रही थी टकटकी लगाए अपने सच को और मुस्कुरा रही थी अपनी ही सोच पर।।

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Welcome @swati_sharma to YoAlfaaz family
Keep writing and sharing

Aapka jo ye post hai adbhud hai, isme ek taraf zindagi hai or dusri taraf khwaishe, bahut khoob sajoya hai tumne sab is post me. Ji haan aapki tarah sabka man kabhi kabhi ud jaane ka karta hai, par agle hi pal apne bhai behen, mata pita, baccho ko dekh apne saare sapne, khwaishe sab jameen par aa jate hai. Kaise apna sab kuch us ek ke liye hum nyochaawar karte jate hai zindagi me pata nhi chalta. or zindagi bas, guzarti jaati hai.

nice post :clap::clap::clap:

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very well penned :slight_smile: