Hostel wale yaari

लिबास से खिताब तक ।
अंधेरे से मेहताब तक ।
राज़ से बयान तक।
मेरी हा हा से मेरी आह आह तक।

सवाब से गुनाह तक साथ देते ज़लील पर सच्चे हैं
ख़ुदा हमेशा सलामत रखना इनको साले सब के सब बड़े अच्छे हैं ।

और तस्वीरों से कैसे बयां करू ।
मेरे दोस्त तो मेरी तक़दीर के हिस्से हैं ।

शब्दों से भी सिर्फ़ कोशिश की हैं।
इतनी मोहलत ना देगी जिंदगी से जो लिख सकू ।
इतने मेरे यारों के किस्से हैं ।

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Wah. :heart:

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Shukriya shukriya

Bahut khub

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Thank you thank you

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