Hath ki lakeer

हाथ की लकीरें न जाने क्या चाहती है
कभी ये वक़्त को अपना तो कभी पराया बनाती है…
कभी बलवान को लाचार तो कभी लाचार को बलवान बनाती है…
समझ ये नहीं आता के, समय के हिसाब से ये बदलती है या इनके हिसाब से समय बदलता है…!!

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Wow. :open_hands:

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:pray::blush: