Happy Daughter's Day

इक दिन की वो मोहताज़ नहीं ,
हर दिन का वो ग़ुरूर है ।
वह बहती हुई हवा नहीं ,
तूफान की हुंकार है ।
वह पायल की झंकार नहीं ,
बारूद की आवाज़ है ।
उसे तलवार की जरूरत नहीं ,
कलम ही उसका हथियार है ।
जिसे सजने की जरूरत नहीं ,
मेहनत ही उसका श्रृंगार है ।
जिसे रीति की परवाह नहीं ,
वो खुद लिखती अपनी आगाज़ है ।
वह “बेटी” है , यहीं उसकी पहचान है ।।

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Kya baat. :heart::heart::heart:

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