Ek kahani!

राज़ की बहुत सी कहानियां है,
आज एक ज़ुबानी मेरी भी , कुछ नादानी सी
वो मिली मुझको थी एक कहानी सी,
सफर शुरू हुआ मेरा और मेरे ख्यालात का , जिस दिन वो सुबह मुझ से मिली थी,
तँग गालियां थी रेलवे स्टेशन की, सुबह का बैठा में , वो आयी थी कुछ लालीमा सी,
सुबह सुबह की बात बताऊँ, आज मैं सारे राज़ रचाऊँ , सफर शुरू हुआ ग्वालियर के रेलवे स्टेशन से और वो मिली मुझ से कुछ लतीफों में,
कुछ हुस्न बेकरार ,
कुछ मुझको ऐतबार , कुछ उसके चेहरे पे था छोटा स इज़्हार,
अटक अटक के मुझको कुछ सुकून दे रहा था,
कुछ बदल रहा था, तो कुछ संभल भी रहा था ।

जुपिटर शायराना ।

6 Likes

Bahut bhadiya andaaz or lay me likhi hai
:ok_hand::ok_hand::ok_hand:

1 Like

बहुत बढ़िया प्रिय!

1 Like

Kya baat hai…
Behad hi khoobsurat rachna… :purple_heart::purple_heart:

1 Like

Bahut shukriya :bouquet:

1 Like

Bahut shukriya :bouquet::bouquet::bouquet:

Thanks sir

Bahut shukriya :bouquet::bouquet::bouquet::bouquet: