Covid-19 💔

कैद किए बेठे हैं इंसान इंसान को
रास्ते और आसमां पे बस बेजुबां दिखते हैं
जबकी जुबानी देने वाले हम अब चार दिवारों में नज़र आते हैं
मेहरबानी खुदा की हैं या इंसानो के गुस्ताखी की
ये सारा संसार विचलित हैं सोच अपने मौत के बारे में
कुछ भटक रहे , तो कुछ रुके हैं,कुछ मर गए तो कुछ झुझ रहे हैं
कुछ आरहे उसके लिपट में तो कुछ आज़ाद हुए अब सुकून से घूम रहे हैं
ये ज़माना ज़ालिम बनने से बचा हैं,जो लुप्त हो रहे थे वो लुप्त होने से बचे हैं
खुदा का कहर हैं या इंसानों से हुईं हैं ये गुस्ताखी
लोग तड़प रहे बाहर जाने को,तो कुछ घर में रहने की ताक में हैं
कुछ मर गए तो कुछ गिन रहे अपनी आखरी साँस हैं
आखिर ये कोई बीमारी हैं या खुदा की दी हुईं कोई शाप हैं?

4 Likes

Nice