Competition_( ऐतराज़ - Aitraaz )

गर्र जो महफ़िल में बयां करू तो ऐतराज़ हैं।
उसके दिल में दफ़्न हैं पर मेरे लब पे आज वो बात हैं ।

उसके मिजाज़ ए दामन में ही गर्द थी
और मैं समझता रहा के उस रात ज़्यादा ठंड थी ।

में उसके लिए सिर्फ काठी था
मेरी गफलत का आलम जो मुझे लगता था कि में ही वाहिद उसका साथी था ।

यार , दोस्त, वक़्त,साँसे ,और लहू
ज़र्रा ज़र्रा मुझसे आज भी सवाल करता हैं ।
में कब तक सहूँ।
किस किस को क्या कहूँ ।
गलतियां जो तुमने की उनपे रोऊँ या हसूं ।
मेरे शाम ए अवध के मेहताब
चल तू ही बता दे में क्या करूँ ।

तेरी यादे , तेरी बातें सब मुझे लफ्ज़ ब लफ्ज़ याद हैं
तू आज भी सर्द की पहली रात की तरह ही ख़ास हैं
तेरे तोहफों में ज़िंदा तेरा हर एक एहसास हैं
सिर्फ तूने रंग बदला मेरे अंदर आज भी जिंदा हर वो जस्बात हैं ।

क्या वो तुझे मुक़म्मल कर पाया हैं ।
क्या वो भी तेरे उतने करीब आया हैं ।
फिर खुद से ही ये सवाल करता हूँ के जो कुछ मेने किया था ।
वो झूठ, वो चोरियां ,वो चोटे, वो मजबूरियां ।
वो लड़कपन ,वो अठखेलियां ।
गर्र जो महफ़िल मैं बयां करु … तो ऐतराज़ है।
उसके दिल… मेरे लब पे आज वो बात हैं।

6 Likes

Bahut khoob @TALIB_ahmed
And
Welcome to YoAlfaaz family
Keep writing and sharing :slightly_smiling_face:

1 Like

Very well written
Welcome to YoAlfaaz family :slight_smile:

1 Like

Thank you so much for this love , surely I would love to share more poem

1 Like

Thanks alot dear. …

1 Like

Keep writing this beautiful works. :heart:
Welcome to YoAlfaaz. :heart:

2 Likes

Thank a ton dear…

2 Likes