Chehre

कितने चेहरों को मिलाकर एक चेहरा बनाते हैं
… लोग हर बात पर एक नया चेहरा दिखाते है
कभी अनजाने से ये सब जानकर भी बन जाते है
… कभी अपने ज्ञान का ढोल पीटते चले जाते हैं
… लोग हर बात पर एक नया चेहरा दिखाते है

कभी अपने मतलब का सब नोच-नोच कर खाते है
… कभी कितने अच्छे हैं ये सबको जा कर बताते है
कभी किसी फुल को ये रौंद कर चले जाते हैं
…तो कभी अपनी बगिया को नये फूलों से सजाते हैं
…लोग हर बात पर एक नया चेहरा दिखाते है

दे कर अंधेरा किसी के घर में चिराग अपने आशियाने में जलाते है
कभी किसी को आँसू दे कर खुद जश्न-ए-महफ़िल सजाते है
कभी अपने शौक को ये पशु- पक्षी तक खा जाते हैं
…कितने चेहरों को मिलाकर एक चेहरा बनाते हैं
… लोग हर बात पर एक नया चेहरा दिखाते है

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Well written… keep it up