Bewafa

दिल की कैद में अब भी उसके उलझे सवाल है
वो तो कबकी दिल से फरार हो चुकी है

बाँहों में उसके दो दिन भी नहीं हुए रहते हुए
उसके जैसी बेकदर तो अब हज़ार हो चुकी है

वो कहती है मेरी बातों से उसे बहुत दर्द होता है
यहाँ भी आँखों से बरसातें सौ बार हो चुकी है

अब बस यादें है उसकी, बाकि फ़र्क़ नही पड़ता
यूँ मोहब्बत में मारे फिरना, बात आम हो चुकी है

यूँ शायरों सी शायरी करते रहना हरदम हर पहर
लगता है शायरी हमारी शराब हो चुकी है

साक्षी शर्मा
Insta : @screative_soul

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Beautifully written!

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Thankyou very much