Alfaz Dil ke

भरा पड़ा है जब सारा आसमान तारों से
पर एक भी सितारा तुम तोड़ ना सको
दिल में भरे हो जो मायूसियों के सागर
तुम एक भी बूंद उड़ेल ना सको
जब हो वो हर चीज जिसे चाहते हो पाना
पर कोई एक वस्तु भी तुम छू न सको
ऐसी तड़प में भी जी सको मुसाफिर
तो हासिल खुद अपना आसमा करो तुम
इस आसमा को रोज़ लाख तारो से भरो तुम
जब झेल सके हो तुम वो तड़ापदाई मुश्किलें
तो मायूसियां झकझोर हंसी गगन में उडो तुम

स्वाती सिंह चौहान

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