Aitraaz

तुम मुझे नाराज़ ना समझना।
मेरी ख़ामोशी को ऐतराज़ ना समझना।

इस कद्र ग़ाफ़िल हूँ खुद से।
गैरों से मिलती है, मुझे मेरी इत्तिला।

यूँही ख़ुश रहना।
हर रोज़ सवरना।
तुम्हें क़सम है।
मेरे ज़मीदोज़ होने की ख़बर पर भी ना ही पिघलना , ना ही बिखरना

Shah Talib Ahmed

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That one is really grt one sir :clap::clap::clap::clap::clap:soo deep…

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Thanks alot dear

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