7_ feb Happy roseday

Roseday

पन्नों की तह में ग़ुलाब के निशां को संभाल रखा हैं।
तेरी ग़ैर मौजूदगी में भी तेरे होने का अहसास पाल रखा हैं ।

ग़ुलाब पसँद हैं उन्हें तो वही कारोबार कर लिया।
वो लौट आये तो जवाब दे सके कि देख तेरी पसंद का ख़याल रखा हैं

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bohot khoob likha hai…

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Shukriya bhai

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Wah. :heart:

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Thanks a lot my friend

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