तेरे साथ । ( 18 plus content )

गज़ब की वो सर्द की रात होती थी ।
हम शोले ठिठुरती हुई कायनात होती थी ।

एक चादर के दरमियां, गुफ़्तगू सारी रात होती थी ।
हिज़्र तलक के साथ कि रोज़ ख़्वाईशात होती थी

हाथों में हाथ होते थे ।
अंगारों से जज़्बात होते थे।
ना उसके तन पे कपड़े।
ना मेरे लिबास होते थे ।

तुम जिस्मफ़रोश कैसे समझोगे।
हम अधूरे अब है ।
हम पूरे थे
जब हम साथ होते थे।

Shah Talib Ahmed

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waaah :clap::clap::clap: @TALIB_ahmed

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So awesome brother
Really nice :ok_hand::ok_hand::ok_hand:

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Shukriya shukriya dear…

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BaHut bahut shukriya bhai…

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Ooohhhhh love it’s air :heart::heart::heart:@TALIB_ahmed

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Yeah… beautiful moment

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Sooo true but when u are love n every single moment is beautiful

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Love remains forever but according to time things changed …

So live like next one may be the last one …

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Gazab! :heart:

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Shukraan

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Good one there. Inspired by your lines I thought of…

गिने चूने एहसासों में भी मुहब्बत बेहिसाब होती है
बेलीबज़ होना तो शर्त नहीं मुहब्बत की
इबादतें तो अकसर पुरलीबाज़ होती है।

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waah :cherry_blossom:

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Umda…

Shukriya

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